Tuesday, December 16, 2008

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया नये वर्ष 2009 के कैलेण्डर का विमोचन

रायपुर, 13 दिसम्बर 2008 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां मंत्रालय में छत्तीसगढ़ राज्य बेवरेजेस कार्पोरेशन द्वारा प्रकाशित आगामी वर्ष 2009 के सचित्र कैलेण्डर का विमोचन किया। यह कैलेण्डर रंग-बिरंगे फूलों के आकर्षक चित्रों से सुसज्जित है। कैलेण्डर में शामिल सभी छायाचित्रों की फोटोग्राफी बेवरेजेस कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री अजय सिंह द्वारा की गई है। श्री अजय सिंह ने मुख्यमंत्री को इस कैलेण्डर के चित्रों की खूबियों की जानकारी दी। डॉ. रमन सिंह ने कैलेण्डर के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी लोगों को आगामी नये वर्ष 2009 की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन, राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री शिवराज सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढांड, बेवरेजेस कार्पोरेशन के अपर आयुक्त आबकारी श्री समुद्र सिंह, महाप्रबंधक श्री आर.एस.ठाकुर और संस्था के अन्य अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Saturday, December 13, 2008

श्री राजेंद्र अनुरागी के निधन पर शोक

मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कवि-साहित्यकार और जनसंपर्क विभाग के पूर्व उप संचालक श्री राजेंद्र अनुरागी के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

श्री चौहान ने अपने शोक संदेश में कहा कि श्री अनुरागी के निधन से प्रदेश ने एक वरिष्ठ साहित्यसेवी खो दिया है। श्री चौहान ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति देने और शोक संतप्त परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

हर व्यक्ति को होगा विकास की मुख्य धारा से जुड़ने का एहसास

मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में संभाला कार्यभार - रायपुर, 13 दिसम्बर 2008 - छत्तीसगढ़ के दोबारा निर्वाचित मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि राज्य के हर व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जुड़ने का एहसास होगा। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को विकास की मुख्य धारा में जुड़ता हुआ देखे और महसूस करे, यह देखना प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। डॉ. सिंह ने आज सवेरे यहां मंत्रालय में पूजा अर्चना के बाद अपना कार्यभार ग्रहण करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। उन्होंने राज्य विधानसभा के द्वितीय आम चुनाव में प्राप्त ऐतिहासिक जनादेश के लिए आम जनता को धन्यवाद देते हुए यह विश्वास दिलाया कि जनादेश के अनुरूप आगामी पांच वर्ष में भी वे राज्य को एक बेहतर, संवेदनशील, जवाबदेह और पारदर्शी सरकार देंगे।

डॉ. सिंह ने कहा कि जनता ने जिस आशा और विश्वास के साथ सरकार चलाने के लिए दोबारा अवसर दिया है, उस पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। विगत पांच वर्षों की तरह आगामी पांच वर्ष में भी गांव, गरीब और किसान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्ष में शुरू की गयी जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ आगामी पांच वर्ष के लिए घोषणा पत्र में किए गए वायदों को योजनाबध्द ढंग से पूर्ण करना प्रदेश की नवनिर्वाचित सरकार की पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि बिजली, पानी, सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों को पूर्ण करने के लिए अधोसरंचना विकास पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा। राज्य के गरीबों में भी सर्वाधिक गरीब लगभग सात लाख परिवारों को अंत्योदय योजना के तहत सिर्फ एक रूपए किलो में और शेष लगभग 30 लाख गरीब परिवारों को सिर्फ दो रूपए किलो में चावल उपलब्ध कराने, किसानों को पांच हार्स पावर तक सिंचाई पम्पों के लिए नि:शुल्क बिजली देने, सभी किसानों को ब्याज मुक्त कृषि ऋण की सुविधा देने, गरीबों को नि:शुल्क नमक प्रदान करने सहित अन्य सभी घोषणाओं का क्रियान्वयन पूरी गंभीरता से किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य में बिजली के उत्पादन को और अधिक बढ़ाने तथा विद्युत वितरण की व्यवस्था को और बेहतर बनाने का विश्वास दिलाते हुए यह भी कहा कि राज्य के अंतिम छोर के गांव और आखिरी घर तक बिजली, पानी, शिक्षा आदि हर प्रकार की सुविधा पहुंचाना प्रदेश सरकार की अहम जिम्मेदारी होगी। डॉ. सिंह ने कहा कि नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग से सरगुजा संभाग तक सरकार आम जनता और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से शांतिपूर्ण विकास के लिए काम करेगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनता की सुरक्षा के और भी अधिक बेहतर उपाय किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा के द्वितीय आम चुनाव में पिछले महीने की 14 और 20 तारीख को हुए मतदान और इस महीने की 08 तारीख को मतगणना में सुस्पष्ट और ऐतिहासिक बहुमत के साथ डॉ. रमन ंसिह ने कल 12 दिसम्बर को यहां पुलिस परेड मैदान में आम जनता के बीच एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और आज उन्होंने सवेरे यहां मंत्रालय पहुंच कर अपने कार्यालय कक्ष में भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना के साथ मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इसके पहले उन्होंने आज सवेरे लगभग पौने ग्यारह बजे मंत्रालय परिसर के मुख्य भवन के प्रथम प्रवेश द्वार पर पूजा-अर्चना के साथ मंत्रालय में प्रवेश किया।

मुख्य सचिव श्री पी.जॉय. उम्मेन और अपर मुख्य सचिव श्री सरजिंयस मिंज सहित मंत्रालय के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रालयीन कर्मचारियों ने पुष्प गुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर सर्वश्री रामविचार नेताम, राजेश मूणत, कोमल जंघेल, विजय बघेल, सिध्दनाथ पैकरा, धरम कौशिक और पुन्नूलाल मोहिले सहित अनेक नवनिर्वाचित विधायक तथा राज्य के विभिन्न जिलों से आए अनेक जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री के आज यहां मंत्रालय में दोबारा कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री शिवराज सिंह, प्रमुख सचिव सर्वश्री विवेक ढांड, टी. राधाकृष्ण, अजय सिंह, सचिव सर्वश्री एन. बैजेन्द्र कुमार, जवाहर श्रीवास्तव, सी.के.खेतान, पी रमेश कुमार, नंदकुमार, पुलिस महानिरीक्षक श्री वाय.के.एस.ठाकुर, उप पुलिस महानिरीक्षक श्री अरूण देव गौतम, संचालक जनसम्पर्क श्री उमेश द्विवेदी, मुख्यमंत्री कार्यालय के उप सचिव श्री आलोक अवस्थी, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सर्वश्री विक्रम सिसोदिया, विवेक सक्सेना, अरूण बिसेन तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी लोगों ने डॉ. रमन सिंह को बधाई और शुभकामनाएं दी।

Friday, December 12, 2008

दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर संस्कृत बोर्ड अध्यक्ष ने दी बधाई

डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से संस्कृत शिक्षा के लिए प्रदेश में बना बेहतर वातावरण : श्री चिन्तामणि सिंह महाराज
रायपुर, 12 दिसम्बर 2008 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को आज यहां प्रदेश के नवनिर्वाचित मुखिया के रूप में दोबारा शपथ ग्रहण करने पर छत्तीसगढ़ संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष श्री चिन्तामणि सिंह महाराज ने हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। श्री चिन्तामणि सिंह महाराज ने कहा है कि डॉ. रमन सिंह ने अपने पांच वर्ष के प्रथम कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में संस्कृत भाषा के विकास और संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने का हरसंभव प्रयास करते हुए संस्कृत बोर्ड को बड़ी उदारता से भरपूर सहयोग दिया। फलस्वरूप राज्य में संस्कृत शिक्षा के लिए एक उत्साहजनक और बेहतर वातावरण निर्मित हुआ है।

बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में इस दौरान जहां राज्य में संस्कृत विद्यालयों की संख्या बारह से बढ़कर 21 तक पहुंच गयी, वहीं पहली बार प्रदेश में शिक्षाकर्मी वर्ग-1 के पदों की भर्ती में संस्कृत विषय को भी विशेष प्राथमिकता दी गयी, ताकि हाईस्कूलों और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में संस्कृत भाषा की बेहतर पढ़ाई हो सके। वर्तमान में राज्य के संस्कृत विद्यालयों में एक हजार 791 विद्यार्थी प्रथमा से उत्तर मध्यमा की कक्षाओं में अध्ययनरत हैं। बोर्ड अध्यक्ष श्री चिन्तामणि सिंह महाराज ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर प्रदेश के अन्य विद्यालयों की तरह संस्कृत विद्यालयों में भी प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक अध्ययनरत सभी बच्चों को नि:शुल्क पाठय पुस्तक वितरित की गई हैं। उन्हें नि:शुल्क गणवेश भी दिए गए हैं। बालिकाओं को नि:शुल्क सायकल वितरित करने की भी योजना है। इन सब कार्यों के लिए मुख्यमंत्री द्वारा बोर्ड को सत्र 2008-09 में लगभग एक करोड़ रूपए का बजट उपलब्ध कराया गया है। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने संस्कृत विद्यालयों के बच्चों को भी कम्प्यूटर शिक्षा से जोड़ने के लिए अब तक तेरह विद्यालयों को कम्प्यूटर भी प्रदान किए हैं।

बोर्ड अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए यह भी उम्मीद जतायी है कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य में संस्कृत भाषा की शिक्षा और संस्कृत साहित्य के विकास के लिए आगामी पांच वर्षों में और भी अधिक रचनात्मक और उत्साहवर्धक वातावरण बनेगा।

Monday, December 8, 2008

सकारात्मक चिंतन का उपयोग करें दूसरों के दु:ख बांटने में - श्री नरसिम्हन

प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन -- रायपुर, 07 दिसम्बर 2008 -- छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने कहा कि सकारात्मक चिंतन से सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। निराशावादी एवं नकारात्मक विचारों से दूर रहते हुए हमें अपनी सकारात्मक शक्ति का उपयोग दूसरों की मदद और दुख बांटने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों की तकलीफों और समस्याओं को सुनकर भी कई बार हम उनकी मदद करते हैं और अपनी सकारात्मक ऊर्जा उन्हें दे सकते हैं। उक्त विचार श्री नरसिम्हन ने आज रायपुर में प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय तथा वैज्ञानिक अभियंता प्रभाग द्वारा 'सकारात्मक और रचनात्मक जीवन' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में व्यक्त किए।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दोनों हाथ जोड़कर किए गए प्रणाम से हमें विभिन्न अवयवों में एकात्मकता का बोध होता है जिसे हमें पाश्चात्य संस्कृति का अनुगमन करने के कारण भूलते जा रहे हैं। वहीं साष्टांग चरण स्पर्श कर प्रणाम करने से आदर एवं एकात्म भाव का बोध उत्पन्न होता है जबकि पाश्चात्य संस्कृति में औपचारिकता का। उन्होंने कहा कि नकारात्मक विचार योग्यता की कमी का परिचायक है। मनुष्य को अपने मस्तिष्क में निहित 'अहं' की भावना का परित्याग कर स्वयं को परमपिता ईश्वर में समर्पित कर देना चाहिए। परिस्थितियां हमारे वश में नहीं होती हैं, परमपिता ईश्वर ही सभी बातों को नियंत्रित करते हैं। प्रसिध्द कर्नाटक संत एवं संगीतज्ञ त्यागराज के उध्दरण को याद करते हुए उन्होंने कहा कि धन से अधिक सुख की प्राप्ति ईश्वर की सेवा में है और ईश्वर की सेवा ही मानवता की सेवा है। उन्होंने कहा कि राजयोग परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग है जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि सकारात्मक विचारों से देश में सभी के जीवन में खुशिया एवं आनंद हो।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए स्टॉक होम में कई निर्णय लिए गए हैं। यदि हम प्राचीन भारतीय वैदिक सभ्यता का अध्ययन करें तो पर्यावरण सुरक्षा का विचार नया नहीं है। हमारे प्राचीन वेद एवं ग्रंथों के अनुसार पशुओं, जीव एवं जंतुओं को देवता तुल्य मानकर पूजा की जाती थी और उन्हें हानि नहीं पहुंचाया जाता था। उन्होंने अपने नाम नरसिम्हन का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान विष्णु ने नरसिंह का रूप लिया वैसे ही सभी जीव-जंतु जैसे शेर को शक्ति का प्रतीक, मोर को कार्तिकेय, मूषक को गणेश, गरूड़ को भगवान विष्णु के वाहक के रूप में देवता के समान पूजा की गई है। वहीं गुणों से युक्त पीपल के वृक्ष एवं तुलसी के पौधे की भी पूजा की जाती थी, उन्हें काटा नहीं जाता था। शुध्द नदी को देवता मानकर लोग स्नान करते थे लेकिन आज हम अपने मूल्यों एवं विश्वासों को भूलते जा रहे हैं और इसे याद करने के लिए हमें स्टॉक होम जाना पड़ता है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि एक ऐसा भी दौर गुजरा है जब आध्यात्म और विज्ञान को परस्पर विरोधी रूप में देखा जाता था और जिसमें संघर्ष के स्वर मुखर होते थे। लेकिन आज दुनिया ने दोनों की सार्थकता और समन्वय के महत्व को समझा है। मानवता के हित के लिए विज्ञान एवं आध्यात्म का समन्वय बहुत जरूरी है। भौतिकवादी सुखों के पीछे बेतहाशा भागना जीवन में संतुष्टि नहीं लाता, बल्कि मानसिक अस्थिरता, तनाव और रोष उत्पन्न करता है। इस दौड़ में जीवन के वास्तविक लक्ष्यों को भूलना आज के समय की एक बड़ी समस्या है। मन की शांति और खुशियां अनमोल है, इन्हें खरीदा नहीं जा सकता। कई बार जहां अत्यधिक धन एवं संपत्ति होने के बावजूद लोगों को मन की शांति प्राप्त नहीं होती। वहीं दूसरी ओर सुविधाहीन एवं गरीब व्यक्ति के मन में शांति हो तो वह खुश रह सकता है।

श्री नरसिम्हन ने कहा है कि हमने अपनी जरूरतों के लिए प्रकृति का अविवेकपूर्वक दोहन किया है। इस कारण आज पूरी पृथ्वी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। बात चाहे ओजोन छतरी के कमजोर होने की हो या ग्रीन हाउस प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, पृथ्वी का तापमान बढ़ने, ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने तथा अम्लीय वर्षा होने जैसी घटना के होने की। पृथ्वी पर इतने अधिक संकट कभी नहीं रहे। इस संकट का जिम्मेदार मनुष्य स्वयं है। प्रकृति मेें मानवीय जरूरतों को पूरा करने की तो क्षमता है लेकिन वह मनुष्य के लोभ को पूरा नहीं कर सकती। पृथ्वी और प्रकृति को बचाने के लिए यह जरूरी है नेचर (प्राकृतिक तत्वों) पर लालचपूर्ण नियंत्रण करने के स्थान पर मनुष्य अपने नेचर (स्वभाव) पर नियंत्रण करे।

जोनल डायरेक्टर इंदौर श्री ओमप्रकाशजी भाई ने कहा कि विज्ञान एवं टेक्नॉलाजी ने मनुष्य को सुविधाएं एवं साधन प्रदान किए लेकिन इसके साथ ही समाज में चिंता, तनाव एवं निराशा बढ़ने लगी। उन्होंने कहा कि ये परिस्थितियां विज्ञान एवं टेक्नॉलाजी में नहीं बल्कि मानव ने स्वयं निर्मित की है। आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य अपने विचारों में बदलाव लाए और निराशावादी विचारों के स्थान पर सकारात्मक विचारों को महत्व दें। उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण तथा इसके नकारात्मक परिणामों की भी चर्चा की। राष्ट्रीय समन्वयक वैज्ञानिक एवं अभियंता प्रभाग श्री बी. के. मोहन सिंघल ने कहा कि जीवन के सभी पहलुओं में आध्यात्मिकता एवं मूल्यों का समावेश होना चाहिए तथा राजयोग के माध्यम से समस्याओं का समाधान प्राप्त करना चाहिए। संस्था की जोनल इंचार्ज छत्तीसगढ़ कमला बहन जी ने कहा कि विश्व में व्याप्त तमाम दुख, भय, निराशा जैसी चुनौतियों का सामना आध्यात्मिकता से ही किया जा सकता है। कार्यकारी संचालक वित्ता भिलाई स्टील प्लांट श्री टी.के. गुप्ता ने कहा कि आनंद को देवताओं ने हृदय में स्थान दिया है, इसलिए आनंद का घर हृदय में ही है। हर सफलता के लिए हृदय तक पहुंचने की कला आनी चाहिए। इस अवसर पर पानीपत के प्रबंधक टे्रनर श्री बी.के. भारतभूषण ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सभी को शपथ दिलाई।

इस अवसर पर 'पृथ्वी ग्रह को बचाओं' स्टेप परियोजना का शुभांरभ राज्यपाल ने किया। इस परियोजना का उद्देश्य जन साधारण को पर्यावरण की दिशा में प्रेरित करना है। श्री नरसिम्हन ने इस परियोजना को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित 'पृथ्वी ग्रह को बचाओ' प्रर्दशनी का भी शुभारंभ किया। इस मौके पर धमतरी की नवनीता बहन ने गीत गाया एवं कार्यक्रम का संचालन ब्रम्हकुमारी माधुरी बहन ने किया।