Monday, October 27, 2008

पद्मश्री डॉ. ए.टी दाबके - संवाद कुशलता भी बढ़ाये

भारतीय चिकित्सा परिषद की हीरक जयंती वर्ष पर आयोजित संगोष्ठी कार्यक्रम के अध्यक्ष तथा छत्तीसगढ़ आयुष एवं चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री डॉ. ए.टी दाबके ने कहा कि आज एकीकृत चिकित्सा शिक्षा के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग सौ वर्ष पुरानी चिकित्सा शिक्षा की पध्दति की जगह एकीकृत चिकित्सा की शुरूआत सबसे पहले ब्रिटेन में प्रारंभ हुई है। इसके अंतर्गत प्रयास रहता है कि विद्यार्थी क्यों और किस प्रकार जैसे जिज्ञासा पूर्ण प्रश्न अधिक पूछे, जिससे उनमें सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिले तथा उनका माइंड अधिक विस्तृत तथा सक्रिय रहे। उन्होंने कहा आज हमारे चिकित्सा के विद्यार्थियों को जरूरत है कि वे अपनी क्लीनिकल कुशलता को बढ़ाने के साथ-साथ प्रेक्टिकल प्रोसिजर और संवाद कुशलता भी बढ़ाये। उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स की नई पीढ़ी से समाज और देश को बड़ी उम्मीद और आशाएं है।

 

शासकीय चिकित्सालय आकर्षण का केंद्र - 5

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